श्रीमद् भगवद्गीता

Gita Dhara

A seeker asked —

Moksh kaise mil sakta h

# मोक्ष कैसे मिल सकता है?

ज़रा रुकिए... यह प्रश्न जितना सरल लगता है, उतना है नहीं। क्योंकि मोक्ष कोई मिलने वाली चीज़ नहीं है — यह आपकी असली स्थिति है, जो भुला दी गई है।


## कृष्ण का गहरा सत्य


अमानित्वमदम्भित्वमहिंसा क्षान्तिरार्जवम्।
आचार्योपासनं शौचं स्थैर्यमात्मविनिग्रहः
13.8


मानित्व-(अपनेमें श्रेष्ठताके भाव-) का न होना, दम्भित्व-(दिखावटीपन-) का न होना, अहिंसा, क्षमा, सरलता, गुरुकी सेवा, बाहर-भीतरकी शुद्धि, स्थिरता और मनका वशमें होना।


### यह श्लोक ज्ञान के लक्षण बताता है

देखिए, कृष्ण यहाँ सीधे मोक्ष का रास्ता नहीं बता रहे — वो उस मिट्टी की बात कर रहे हैं जिसमें मोक्ष का बीज उग सकता है।

आप किसी से कहें "मुझे प्रेम चाहिए" — तो प्रेम नहीं आएगा। लेकिन अगर आप ईमानदार, निर्भय, खुले दिल से जीएं, तो प्रेम अपने आप उमड़ आता है। ठीक ऐसे ही मोक्ष के साथ है।


## तीन रास्ते — एक ही मंज़िल

गीता में कृष्ण तीन मार्ग बताते हैं:

### 1. कर्मयोग — काम करो, फल मत माँगो


कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥
2.47


तेरा अधिकार केवल कर्म करने में है, फल में कभी नहीं। कर्म के फल का हेतु मत बन, और कर्म न करने में भी तेरी आसक्ति न हो।

सोचिए — आप रोज़ ऑफिस जाते हो। करते हो, क्योंकि पैसा चाहिए, प्रमोशन चाहिए, तारीफ चाहिए। अब चिंता लगी है साथ में। अगर नहीं मिला तो? फिर निराशा, गुस्सा, ईर्ष्या।

कृष्ण कहते हैं: कर्म करो पूरी ताकत से — लेकिन परिणाम को भगवान पर छोड़ दो। जब आप ऐसे जीते हो, तो तनाव खत्म, मन शांत, और शांत मन में ही परमात्मा दिखता है।


### 2. भक्तियोग — समर्पण का रास्ता

कुछ लोगों का दिल इतना भरा होता है कि वो विश्लेषण नहीं कर सकते — उन्हें बस प्रेम करना आता है।

तो कृष्ण कहते हैं: मेरे में खो जाओ। मुझे याद करो। सब कुछ मुझे अर्पित कर दो।

जब भक्ति पूर्ण हो जाती है, तो भक्त और भगवान में फर्क मिट जाता है — यही मोक्ष है।


### 3. ज्ञानयोग — जानो कि तुम कौन हो


विद्याविनयसंपन्ने ब्राह्मणे गवि हस्तिनि।
शुनि चैव श्वपाके च पण्डिताः समदर्शिनः
5.18


ज्ञानी महापुरुष विद्या-विनययुक्त ब्राह्मणमें और चाण्डालमें तथा गाय, हाथी एवं कुत्तेमें भी समरूप परमात्माको देखनेवाले होते हैं।

यह सबसे गहरा मार्ग है।

ज्ञानी समझ जाता है कि सब कुछ एक ही चेतना से बना है — ब्राह्मण हो या चाण्डाल, इंसान हो या कुत्ता। शरीर अलग है, पर अंदर की आत्मा एक है।

जब आपको यह सच्चाई अनुभव हो जाती है (सिर्फ सुनने से नहीं), तब आप मुक्त हो जाते हो। क्योंकि फिर कोई डर नहीं, कोई इच्छा नहीं, कोई बंधन नहीं


## लेकिन... योगभ्रष्ट का क्या?

अब सोचिए — कोई शुरू करता है, फिर बीच में छूट जाता है। तो?


प्राप्य पुण्यकृतां लोकानुषित्वा शाश्वतीः समाः।
शुचीनां श्रीमतां गेहे योगभ्रष्टोऽभिजायते
6.41


वह योगभ्रष्ट पुण्यकर्म करनेवालोंके लोकोंको प्राप्त होकर और वहाँ बहुत वर्षोंतक रहकर फिर यहाँ शुद्ध श्रीमानोंके घरमें जन्म लेता है।



अथवा योगिनामेव कुले भवति धीमताम्।
एतद्धि दुर्लभतरं लोके जन्म यदीदृशम्
6.42


अथवा (वैराग्यवान्) योगभ्रष्ट ज्ञानवान् योगियोंके कुलमें ही जन्म लेता है। इस प्रकारका जो यह जन्म है, यह संसारमें बहुत ही दुर्लभ है।


कुछ भी बर्बाद नहीं होता।

अगर आज आपने एक कदम उठाया, फिर छोड़ दिया — तो अगले जन्म में आप वहीं से शुरू करेंगे। यह यात्रा कभी खत्म नहीं होती, सिर्फ टल जाती है


## तो करना क्या है?

सबसे पहले: अपने स्वभाव को पहचानो।

- अगर आपका मन कर्म में लगता है → कर्मयोग
- अगर दिल भक्ति चाहता है → भक्तियोग
- अगर बुद्धि सत्य खोजती है → ज्ञानयोग

दूसरा: धैर्य। मोक्ष कोई इनाम नहीं है जो एक दिन मिल जाएगा। यह एक परिपक्वता है, जो धीरे-धीरे आती है।

तीसरा: जीवन में अहंकार, दिखावा, हिंसा को छोड़ते जाओ। क्योंकि ये दीवारें हैं — इन्हें हटाओ, तो मोक्ष खुद दिख जाएगा।


## एक आखिरी बात


सखेति मत्वा प्रसभं यदुक्तं
हे कृष्ण हे यादव हे सखेति।
अजानता महिमानं तवेदं
मया प्रमादात्प्रणयेन वापि
11.41


आपकी महिमा और स्वरूपको न जानते हुए 'मेरे सखा हैं' ऐसा मानकर मैंने प्रमादसे अथवा प्रेमसे हठपूर्वक (बिना सोचे-समझे) 'हे कृष्ण ! हे यादव ! हे सखे !' इस प्रकार जो कुछ कहा है... वह सब अप्रमेय स्वरुप आपसे मैं क्षमा माँगता हूँ।


अर्जुन ने जब कृष्ण का विराट रूप देखा, तो डर गया। उसे लगा — मैं कितना छोटा हूँ, मैंने कितनी गलतियाँ की।

लेकिन कृष्ण ने उसे माफ़ कर दिया। क्योंकि रास्ते पर चलना ही काफी है। परिपूर्णता की ज़रूरत नहीं है — बस ईमानदारी चाहिए।


### तो मोक्ष कैसे मिलेगा?

जब आप उसे पाने की कोशिश छोड़ देंगे।
जब आप बस जीने लगेंगे — बिना डर, बिना लालच, बिना अहंकार।
जब आपको समझ आएगा कि आप कभी बंधे ही नहीं थे।


अब एक सवाल आपके लिए:
क्या आपको लगता है कि मोक्ष कहीं दूर है... या आपके भीतर ही छुपा है, सिर्फ देखना बाकी है?
Shared by Shekhar Sharma · Mar 5, 2026 · 1 views

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